अनुसंधान

 

भारत में कॉफ़ी अनुसंधान


भारत, संसार के ऐसे कुछ देशों में से एक है जहाँ बागान समुदाय को तकनीकी दिशा-निर्देश देने के उद्देश्य से कॉफ़ी अनुसंधान की शुरुआत हुई है। कॉफ़ी बागानों में विभिन्न कीटाणुओं एवं रोगों से मुक्ति पाने के लिए अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम के रूप में 1892 में दक्षिण भारतीय संयुक्त प्लांटर्स संगठन की स्थापना की गई थी। बाद में 1925 में तत्कालीन मैसूर सरकार के कृषि निदेशक डॉ.सी.एल. कोलमैन ने महत्वपूर्ण दूरदर्शी प्रयास के रूप में कर्नाटक के चिक्कमगलूरु जिले के बालेहोन्नूर के पास मैसूर कॉफ़ी परीक्षण संस्थान के नाम पर अनन्य कॉफ़ी अनुसंधान संस्थान की स्थापना की जिसका प्राथमिक उद्देश्य विभिन्न कॉफ़ी प्रकारों के संवर्धन तथा कीटाणुओं तथा रोगों के नियंत्रण उपायों का विकास था । इस परीक्षण केंद्र के प्रथम प्रभारी अनुसंधान अधिकारी डॉ.एम.के.वेंकट राव, माइकोलजिस्ट थे तथा 1925-31 के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से पत्ता रोग प्रतिरोधी अरेबिका सामग्रियों के संग्रहण का दायित्व उन्हें सौंपा गया था।कॉफ़ी पत्ता किट्ट फंगस के शारीरिक अस्थित्व तथा विस्तारक मान में पत्ता किट्ट फंगस पर बोरडक्स मिश्रण के सुव्यवस्थित फुहार के अध्ययन के नेतृत्व के लिए यूपीएएसआई से श्री.एम.डब्ल्यू . माइने, कॉफ़ी वैज्ञानिक अधिकारी को प्रतिनियुक्त किया गया था। श्री.के.एच.श्रीनिवासन, कृषि सहायक निदेशक तथा श्री.आर.एल.नरसिंह स्वामी, प्लांट ब्रीडिंग निरीक्षक के सहयोग के साथ श्री.एम.डबल्यू. माइने के सफल प्रयास से 1940 में प्रथम संशोधित अरेबिका चयनित एस.288 व एस.333 जारी किए गए।

कॉफ़ी बोर्ड का प्रारंभ

1940 के दशक के दौरान द्वितीय विश्व युद्ध के परिणामस्वरूप निम्नतम मूल्य तथा कीटाणुओं एवं रोगों के आक्रमण के कारण भारतीय कॉफ़ी उद्योग अत्यंत निराशाजनक स्थिति में था। इसी समय भारत सरकार ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन संवैधानिक अधिनियम “कॉफ़ी अधिनियम VII-1942” के द्वारा कॉफ़ी बोर्ड की स्थापना की। बोर्ड को कॉफ़ी क्षेत्र के विपणन, वित्त, अनुसंधान एवं विकास आदि क्षेत्र के विस्तार के समर्थन का दायित्व सौंपा गया। तदनुसार, बोर्ड ने 1946 में ‘ मैसूर कॉफ़ी परीक्षण केंद्र ’ का बागडोर सँभाला तथा उसका “ केंद्रीय कॉफ़ी अनुसंधान संस्थान ” के रूप में पुन:नामकरण किया। कॉफ़ी के विभिन्न क्षेत्रों के सविस्तार अनुसंधान एवं उपजकर्ताओं की सहायता के लिए समय-समय पर आधुनिक प्रौद्योगिकी के कार्यान्वयन के विस्तृत अधिदेश के साथ कॉफ़ी बोर्ड ने इस संस्थान को अपने अनुसंधान विभाग का मुख्यालय बना दिया।

केंद्रीय कॉफ़ी अनुसंधान संस्थान, बालेहोन्नूर

अनुसंधान केंद्रों का नेटवर्क

कॉफ़ी अनुसंधान उपकेंद्र (सीआरएसएस), चेट्टल्ली, कर्नाटक

क्षेत्रीय कॉफ़ी अनुसंधान केंद्र (आरसीआरएस), चुंडेल, केरल

क्षेत्रीय कॉफ़ी अनुसंधान केंद्र (आरसीआरएस), थांडीगुड़ी, तमिलनाडु

क्षेत्रीय कॉफ़ी अनुसंधान केंद्र (आरसीआरएस), आर.वी.नगर, आंध्रप्रदेश

क्षेत्रीय कॉफ़ी अनुसंधान केंद्र (आरसीआरएस), दिफु, असम

पौधा सुधार एवं जैवप्रौद्योगिकी

सस्यविज्ञान प्रभाग

कृषि रसायनविज्ञान प्रभाग

फसल कायिकी प्रभाग

पौधा रोग विज्ञान प्रभाग

कीट विज्ञान/ सूत्रकृमि विज्ञान प्रभाग

फसलोत्तर प्रौद्योगिकी प्रभाग

गुणता प्रभाग

विश्लेषिक प्रयोगशाला

महत्वपूर्ण अनुसंधान योगदान

राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग

अंतरराष्ट्रीय सहयोगी परियोजनाएँ

बहु-संस्थागत राष्ट्रीय परियोजनाएँ

संस्थान द्वारा प्रदत्त सेवाएँ

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