कॉफ़ी क्षेत्र - भारत

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 भारतीय कॉफ़ी का परिचय


छाया में उगाई जाने वाली विश्व की सर्वोत्तम ‘ मृदु ’ कॉफ़ी

भारतीय कॉफ़ी , पेयों में अत्यंत असाधारण पेय है, जो मनमोहक विलक्षणता तथा उद्दीपक तीव्रता प्रदान करती है। भारत ऐसा एकमात्र देश है जहाँ सारी कॉफ़ी छायादार पेड़ों के नीचे उपजाई जाती है। यहाँ की कॉफ़ी विशेषतया, मृदु होती है और अधिक अम्लीय नहीं होती, इन कॉफियों में संपूर्ण असाधारण स्वाद तथा उत्तम सुगंध होते हैं।


भारतीय कॉफ़ी में एक अनोखी ऐतिहासिक महक भी है। ये सब लगभग चार सौ साल पूर्व एक लंबी कठिन यात्रा के साथ प्रारंभ हुआ, जब प्रसिद्ध संत बाबा बुदान सुदूरस्थ यमन से सात जादुई फलियाँ लाए और उन्हें कर्नाटक के चंद्रगिरि पहाडियों पर रोपा। आप प्रत्येक कॉफ़ी पीने के साथ उस अनोखी शुरुआत का संवेदन भारतीय कॉफ़ी के स्वाद, महक, आकार तथा अम्लीयता में अनुभव कर सकते हैं।


अक्सर यह कहा जाता है कि भारतीय कॉफ़ी के उपजकर्ता अपने फसल में अपनी जान डाल देते हैं। तब इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि भारत ने डेढ़ सौ वर्षों से भी अधिक समय के लिए उत्तम गुणता की कॉफ़ी के अनोखे प्रकार का निरंतर उत्पादन तथा निर्यात किया है।
 

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उपजाने की परिस्थितियाँ

भारत में सभी कॉफ़ी की संपूर्ण खेती उत्तम द्वि-स्तरीय मिश्रित छायादार पेड़ों के अधीन की जाती है जिनमें सदाबहार फलीदार पेड़ भी पाए जाते हैं। कॉफ़ी बागानों में लगभग 50 विभिन्न प्रकार के छायादार पेड़ पाए जाते हैं। छायादार पेड़ ढलवाँ धर्ती पर भूक्षरण रोकते हैं, वे मिट्टी की गहराई में जमे हुए पोषक तत्वों के पुनःचक्रण द्वारा मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं तथा तापमान के मौसमी परिवर्तन से कॉफ़ी पौधों को सुरक्षा प्रदान करते हैं और विभिन्न प्रकार के वनस्पति तथा जीवजंतुओं को अपने आँचल में बसा देते हैं।


भारत के कॉफ़ी बागान मौलिक मसालाओं का विशाल संसार भी है, मसाले एवं फल तथा काली मिर्च, इलायची, वैनिला, संतरा तथा केला जैसे अनेक फसलों के प्रकार कॉफ़ी पौधों के साथ उगाए जाते हैं।


भारत के कॉफ़ी उपजाने वाले क्षेत्रों की मौसमी परिस्थितियाँ विभिन्न होती हैं जो विभिन्न प्रकार की कॉफियों की खेती के लिए उपयुक्त है। अधिक उन्नतांश वाले कुछ क्षेत्र मृदु गुणता की अरेबिका कॉफ़ी के लिए उपयुक्त हैं जबकि गर्म आर्द्र परिस्थितियाँ रोबस्टा के लिए अत्यंत अनुकूल हैं।


घटक अरेबिका रोबस्टा
मिट्टी गहरी, उर्वर, जैव तत्वों से भरी, अधिक छनी हुई तथा हल्की अम्लीय (पी.एच 6.0-6.5) अरेबिका के समान
ढ़लवाँ हल्के से मध्यम स्तरीय ढलवाँ हल्के ढलवाँ से समतलीय खेत
उन्नतांश 1000-1500 मी. 500-1000 मी.
पहलू उत्तर, पूर्व और पूर्वोत्तर पहलू अरेबिका के समान
तापमान 150 से-250 से; ठंडा, समस्तरीय 200 से - 300 से; गर्म, आर्द्र
सापेक्षिक आर्द्रता 70-80% 80-90%
वार्षिक वर्षापात 1600-2500 मि.मी. 1000-2000 मि.मी.
पुष्पण बौछार मार्च- अप्रैल (25-40मि.मी.) फरवरी-मार्च (25-40 मि.मी.)
समर्थक बौछार अप्रैल-मई (50-75 मि.मी.) सुवितरित मार्च-अप्रैल (50-75 मि.मी) सुवितरित

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महत्वपूर्ण प्रकार


केंट्स: केंट्स अरेबिका का प्राचीनतम विभेद है, जिसे 1920 के दशक में इसी नाम के एक अंग्रेज रोपक ने चुना था। रोपण समुदाय में अरेबिका का यह प्रकार, 1940 तक लोकप्रिय रहा, क्योंकि इस पर पत्ती किट्ट कम प्रभावकारी था। आजकल यह अधिक क्षेत्रों में नहीं उगाया जाता, पर अब भी यह अपनी विशिष्ट कप गुणता के कारण जाना जाता है।


एस.795 : - यह 1940 के दशक में उत्तम उपज, बड़ी फली, उच्चत्तम गुणता तथा पत्ती किट्ट के विरुद्ध अपेक्षित प्रतिरोधकता के साथ इसे जारी किया गया जो सबसे लोकप्रिय अरेबिका श्रेणी है। इस श्रेणी को अपनी उत्तम गुणता के लिए प्रसिद्ध ’केन्ट्स’ अरेबिका का प्रयोग करते हुए विकसित किया गया। आज भी एस.795 रोपकों के बीच लोकप्रिय है और सबसे अधिक खेती किए जाने वाला अरेबिका विभेद है। एस.795 में मोका के हल्के स्वाद के साथ संतुलित कप है।


कावेरीः काटीमोर के नाम से प्रचलित कावेरी, ’काटूरा’ और ’हाइब्रिडो-डी-टिमोर’ के बीच संकर श्रेणी है। काटूरा प्रचलित बोर्बोन विभेद का प्राकृतिक उद्भेदी है। अतः कावेरी ने काटूरा के उत्तम उपज एवं श्रेष्ठ गुणता की विशेषता तथा ’हाइब्रिडो-डी-टिमोर’ के प्रतिरोधी गुण को अपनाया है।


एस.एल.एन 9: सेलेक्शन 9 एथियेपियन अरेबिका संग्रह, ‘टफ़रिकेला’ तथा ‘हाइब्रिडो-डी-टिमोर’ के बीच की संकर श्रेणी है। एस.एल.एन 9 ने ’टफारिकेला’ के सभी श्रेष्ठ कप गुणता की विशिष्टता अपनाई है। कॉफ़ी की इस श्रेणी ने भारतीय कॉफ़ी बोर्ड द्वारा आयोजित ’फ्लैवर ऑफ इंडिया - कप्पिंग प्रतियोगिता-2002’ में सर्वोत्तम अरेबिका के लिए फ़ाइन कप अवार्ड जीता है।


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कॉफ़ी के विभिन्न क्षेत्रों को दर्शाता हुआ मानचित्र


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भारत में कॉफ़ी उपजाने वाले क्षेत्रों को तीन विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत श्रेणीकृत किया जा सकता है : पारंपरिक क्षेत्र:


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कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडू जैसे दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व करने वाले पारंपरिक क्षेत्र

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देश के पूर्वी घाटों में स्थित आंध्रप्रदेश एवं उड़ीशा को सम्मिलित करते हुए गैर-पारंपरिक क्षेत्र

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अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम,मणिपुर,नागालैंड ,मेघालय जैसे पूर्वोत्तर राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हुए पूर्वोत्तर क्षेत्र


दक्षिण के कॉफ़ी बागान, भारतीय कॉफ़ी का पालना है। इनमें कर्नाटक का बाबा बुदान पहाड़ सम्मिलित है, जिसे भारतीय कॉफ़ी का जन्मस्थली माना जाता है। पूर्वी घाट एवं पूर्वोत्तर राज्य कॉफ़ी के नव-विकसित क्षेत्र हैं।


उन्नतांश, वर्षापात इत्यादि से संबंधित विनिर्दिष्टता के साथ क्षेत्रीय लॉगो
 

Anamalais Imagecoffeeregions TN State
आनमलैस (तमिलनाडु): इस क्षेत्र के अभयारण्य चितकबरे चीतों का वासस्थल है, जबकि बागान सर्वोत्तम उपज प्रदान करने वाले अरेबिका का वासस्थान है जिसमें अनोखे केंट्स भी सम्मिलित है।

 

  

 

उन्नतांश : 1000-1400 मी. एम एस एल
वर्षापात : 2500-3000 मि.मी.
कॉफ़ी के मुख्य प्रकार : अरेबिका
कॉफ़ी के अधीन कुल क्षेत्र : 2,500 हे.
औसत उत्पादन : 1,500 मे.ट.
मुख्य प्रकार : एस.795, कावेरी, एस.एल.एन.9
मुख्य अंतरफसल : काली मिर्च, संतरा, केला

ArakuValley Imagecoffeeregions AP State
अरकु वैली (आंध्रप्रदेश) : इस क्षेत्र के अभयारण्य चितकबरे चीतों का वासस्थल है, जबकि बागान सर्वोत्तम उपज प्रदान करने वाले अरेबिका का वासस्थान है जिसमें अनोखे केंट्स भी सम्मिलित है।

 

 

उन्नतांश : 900-1100 मी. एम एस एल
वर्षापात : 1000-1200 मि.मी.
कॉफ़ी के मुख्य प्रकार : अरेबिका
कॉफ़ी के अधीन कुल क्षेत्र : 20,000 हे
औसत उत्पादन : 3,100 मे.ट.
मुख्य प्रकार : एस.795, एस.एल.एन.4,एस.एल.एन.5, कावेरी
मुख्य अंतरफसल : काली मिर्च, आम, कटहल व सब्जियाँ

Bababudangiriscoffeeregions KA State
बाबा बुदान गिरी (कर्नाटक):बाबा बुदान यमन से सात ’जादुई’ फलियाँ लाए और उन्हें इस क्षेत्र के उन्नत पहाडियों में रोपा। अत्यधिक मात्रा में संपूर्णतया पनपे हुए अरेबिका के बागानों के अंदर अक्सर चरते हुए हिरण देखे जा सकते हैं।

 

 

 

उन्नतांशः1000-1500 मी. एम एस एल
वर्षापात : 1750-2200 मि.मी.
कॉफ़ी के मुख्य प्रकार : अरेबिका
कॉफ़ी के अधीन कुल क्षेत्र : 15,000 हे.
औसत उत्पादन : 10,500 मे.ट.
मुख्य प्रकार : एस.795, एस.एल.एन.9,कावेरी
मुख्य अंतरफसल : काली मिर्च, इलायची व सुपारी

Biligiriscoffeeregions KA & TN State
बिलिगिरीस (कर्नाटक/तमिलनाडू):  संपूर्णतया पनपे हुए अरेबिका के अलावा यह क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा हिरन बडे सींगों वाले साँभर के लिए भी विख्यात है।

 

 

उन्नतांश : 1500-2000 मी. एम एस एल
वर्षापात : 1100-1200 मि.मी.
कॉफ़ी के मुख्य प्रकार : अरेबिका
कॉफ़ी के अधीन कुल क्षेत्र : 800 हे.
औसत उत्पादन : 700-800 मे.ट.
मुख्य प्रकार : एस.795, कावेरी एस.एल.एन.9
मुख्य अंतरफसल : संतरा,केला व काली मिर्च

Brahmapulracoffeeregions KA State
ब्रह्मपुत्र :पूर्वोत्तर राज्यों से बहने वाली प्रचंड ब्रह्मपुत्र नदी इस क्षेत्र की जीवनरेखा है। यह एकल सींग के गैंडों का घर भी है। पूर्वी असम के काज़ीरंगा नेशनल पार्क में ये बलवान जानवर अधिक संख्या में पाए जाते हैं।

 

 

 

उन्नतांश : 700-1200 मी. एम एस एल
वर्षापात : 1000-4500 मि.मी.
कॉफ़ी के मुख्य प्रकार : अरेबिका व रोबस्टा
कॉफ़ी के अधीन कुल क्षेत्र : अरेबिका 37,000 हे. रोबस्टा 23,000 हे.
औसत उत्पादन : अरेबिका 29,000 मे.ट., रोबस्टा 30,000 मे.ट.
मुख्य प्रकार : अरेबिका एस.795, एस.एल.एन.5बी एस.एल.एन.9 कावेरी, रोबस्टा-पेरिडेनिया ,एस.274, सी x आर
मुख्य अंतरफसल : काली मिर्च, इलायची,सुपारी,संतरा,वैनीला

Chikmagalurcoffeeregion KA State
चिक्कमगलूरु(कर्नाटक) :  चिक्कमगलूरु के जंगल तथा अभयारण्य में भारत के राष्ट्रीय पक्षी सुंदर मोर अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। मोर विशेषतया अपने लंबे प्रणय नृत्य के दौरान अपनी विशाल रंगीन पंखें फैलाकर नृत्य करना पसंद करते हैं।

 

 उन्नतांश : 750-1100 मी. एम एस एल
वर्षापात : 1000-2500 मि.मी.
कॉफ़ी के मुख्य प्रकार : अरेबिका व रोबस्टा
कॉफ़ी के अधीन कुल क्षेत्र : अरेबिका-26,000 हे, रोबस्टा-56,000 हे.
औसत उत्पादन : अरेबिका 24,000 मे.ट. रोबस्टा 69,000 मे.ट.
मुख्य प्रकार : अरेबिका- एस.795, एस.एल.एन.6, एस.एल.एन.9 कावेरीः रोबस्टा-एस 274 सी x आर
मुख्य अंतरफसल : काली मिर्च,इलायची,संतरा,सुपारी व केला

Coorg Imagecoffeeregions KA State
कूर्ग (कर्नाटक):  यहाँ के सघन कॉफ़ी बागान मधु-मक्खियों के हलचल से मुखरित हैं जो स्वादिष्ट कूर्ग मधु उत्पन्न करती हैं जिसे यहाँ के द्रुतगामी जनजातीय लोग संकलित करते हैं।

 

उन्नतांश : 900-1100 मी. एम एस एल
वर्षापात : 1000-2500 मि.मी.
कॉफ़ी के मुख्य प्रकार : अरेबिका व रोबस्टा
Total area under coffee : Arabica - 26,000 ha,Robusta - 56,000 ha
Average production : Arabica - 24,000 MT,Robusta - 69,000 MT
Main varieties : Arabica - S.795, Sln.6, Sln.9; Cauvery; Robusta - S.274, CxR
Main intercrops : Pepper, Cardamom, Orange,Banana, Arecanut

Manjarabadcoffeeregions TN State
मंजराबाद (कर्नाटक) :  छोटे झरनों एवं कॉफ़ी के पौधे से युक्त हल्की ढ़लवाँ धर्ती जंगली मुर्गों का प्राकृतिक वासस्थल है। कॉफ़ी बागानों के पास लाल कलगी और बहु रंगीन पंखों वाली पीले सिर वाले इस पक्षी को प्रायः जोडों में देखा जाता है।.

 

 

उन्नतांश : 900-1100 मी. एम एस एल
वर्षापात : 1000-2500 मि.मी.
कॉफ़ी के मुख्य प्रकार : अरेबिका व रोबस्टा
कॉफ़ी के अधीन कुल क्षेत्र : अरेबिका 31,700 हे रोबस्टा-9,400 हे.
औसत उत्पादन : अरेबिका 21,000 मे.ट. रोबस्टा 9,500 मे.ट.
मुख्य प्रकार : अरेबिका- एस.795, एस.एल.एन.6, एस.एल.एन.9 कावेरी, रोबस्टा-एस 274, सी x आर
मुख्य अंतरफसल : काली मिर्च, इलायची, संतरा, सुपारी व केला

 

 

Nilgiriscoffeeregions TN State
नीलगिरीस (तमिलनाडु) :  इस प्रदेश के अभयारण्य चितकबरे चीतों का आवास स्थान है। जबकि यहाँ के बागान असाधारण केंट्स सहित अत्यधिक ऊंचे पनपने वाले अरेबिका के वासस्थल है।

 

  

उन्नतांश : 900-1400 मी. एम एस एल
वर्षापात : 1600-2600 मि.मी.
कॉफ़ी के मुख्य प्रकार : अरेबिक व रोबस्टा
कॉफ़ी के अधीन कुल क्षेत्र : अरेबिका -3,600 हे, रोबस्टा- 4,000 हे.
औसत उत्पादन : अरेबिका-1400 मे.ट. रोबस्टा-2800 मे.ट.
मुख्य प्रकार : अरेबिका-एस.795, केन्टस,कावेरी रोबस्टा पेरिडेनिया,एस 274, सी x आर
मुख्य अंतरफसल : काली मिर्च,संतरा,केला,अदरक व सब्जियाँ

Pulneyscoffeeregions TN State
पलनीस (तमिलनाडु) : : इस प्रदेश की अनोखी विशिष्टता यह है कि यहाँ बारह सालों में एक बार खिलनेवाले नीले रंग के घंटीनुमा कुरंजी फूल अप्रत्याशित सुंदर दृश्य प्रस्तुत करते हैं। यहाँ प्रति वर्ष अत्यधिक ऊंचे पनपने वाले अरेबिका अधिक संख्या में दिखाई देते हैं।

 

 

उन्नतांश : 600-2000 मी. एम एस एल
वर्षापात : 1000-1600 मि.मी.
कॉफ़ी के मुख्य प्रकार : अरेबिका
कॉफ़ी के अधीन कुल क्षेत्र : 14,000 हे.
औसत उत्पादन : 7,500 मे.ट.
मुख्य प्रकार : एस.795, एस.एल.एन 5 बी, एस.एल.एन 9,एस.एल.एन10 व कावेरी
मुख्य संतरा,केला,काली मिर्च,इलायची व सब्जियाँ

Shevaroyscoffeeregions TN State
शेवरॉय्स (तमिलनाडु) : शक्तिशाली गौर या भारतीय भैस की तरह भारी भरकम अरेबिका यहाँ उगाई जाती हैं। इस मनोरम पहाड़ के निचले भाग में विशाल सूँड तथा बलिष्ठ पाँववाले इस प्रबल जानवर को घास चरते देखे जा सकते हैं ।

 

 

 

उन्नतांश : 900-1500 मी. एम एस एल
वर्षापात : 800-1500 मि.मी.
कॉफ़ी के मुख्य प्रकार : अरेबिका
कॉफ़ी के अधीन कुल क्षेत्र : 5,000 हे
औसत उत्पादन : 3,000मे.ट.
मुख्य प्रकार : एस.795,कावेरी, एस.एल.एन.9
मुख्य अंतरफसल : संतरा, केला व काली मिर्च

Travancorecoffeeregions Kerala
ट्रावनकूर (केरल) : भारत के राष्ट्रीय फूल कमल, शुद्धता एवं सुंदरता का प्रतीक है। जलप्लावित पत्ते तथा लंबी तनेवाले ये अति सुगंधित फूल उथले पानी में उगते हैं तथा यह प्रदेश अरेबिका एवं रोबस्टा दोनों के लिए प्रसिद्ध है। .

 

 

उन्नतांश : 400-1600 मी. एम एस एल
वर्षापात : 2000-4000 मि.मी.
कॉफ़ी के मुख्य प्रकार : रोबस्टा
कॉफ़ी के अधीन कुल क्षेत्र : 13,000 हे.
औसत उत्पादन : 9,000मे.ट.
मुख्य प्रकार : एस.274, सी x आर
मुख्य अंतरफसल : काली मिर्च, केला, अदरक, सब्जियाँ व औषधीय पौधे

Wayanaad coffeeregions KL State

वयनाड (केरल) : वयनाड, शूरता एवं साहस के प्रतीक भारत के राष्ट्रीय जानवर भारतीय बाघ का आवास स्थल है।

 

उन्नतांश : 600-900 मी. एम एस एल
वर्षापात : 1100-1200 मि.मी.
कॉफ़ी के मुख्य प्रकार : रोबस्टा
कॉफ़ी के अधीन कुल क्षेत्र : 67,000 हे
औसत उत्पादन : 54,000मे.ट.
मुख्य प्रकार : पेरिडेनिया, एस.274, सी x आर
मुख्य अंतरफसल : काली मिर्च, केला, अदरक व सब्जियाँ

भारत की विशिष्ट कॉफियाँ

             

मानसूंड मलबार एए

Monsooned Malabar

 

कई शताब्दियों से पूर्व, जब जहाज़ द्वारा यूरोप के लिए कॉफ़ी दाने का परिवहन कर रहा था तब एक ‘अनोखी घटना ’ हुई। मानसूनी हवा से दाने सूज गए, उनके रंग बदल गए तथा उन्हें सशक्त-मोहक स्वाद से पारखी प्राप्त हो गई। आजकल विश्वप्रसिद्ध विशिष्ट कॉफ़ी तैयार करने के लिए सर्वोत्तम अरेबिका बींस के मानसूनिंग द्वारा उसी जादू का पुनर्सृजन हो गया।


दक्षिण भारत के पश्चिमी तट पर स्थित क्यूरिंग वर्क्स में मानसूंड कॉफ़ी या कॉफ़ी दाने वायु की नमी से सूजे जाते हैं। उसके बाद उन्हें विशिष्ट भंडारणों में भंडारित करके कॉफ़ी बींस बैगों पर नमीयुक्त मानसूनी हवा परिचालित की जाती है तथा उन्हें अपेक्षित आकार प्राप्त कराते हुए अत्यंत रसीले स्वाद में परिवर्तित कराते हैं। इस प्रक्रिया से दाने पीले होकर उसकी अम्लता कम होती है तथा प्राचीन कॉफ़ी के सघन मोहक स्वाद में परिवर्तित होते हैं।


मानसूंड कॉफ़ी तैयार करने के लिए केवल सूखे संसाधित अरेबिका एवं रोबस्टा दानों का ही उपयोग किया जाता है। स्वाद व तीखापन सुधारने तथा अधिक अम्लीय कॉफ़ी के लिए इन कॉफियों में ब्लेंड्स का उपयोग किया जाता है। मानसूंड कॉफ़ी की सर्वोत्तम श्रेणी का नाम मानसूंड मलबार एए है।


मैसूरु नग्गट्स एक्स्ट्रा बॉल्ड

Mysore Nuggets

 

मैसूरु के चामुंडी हिल्स की अखंड नंदी बुल की मूर्ति की शक्ति व वैभव इन बड़े, सुगंधित अरेबिका बींस पर प्रतिबिंबित है, जो इस विरल, प्रीमियम विशिष्ट कॉफ़ी को विशेषज्ञों का मनपसंद कॉफ़ी बना देते हैं।

चिक्कमगलूर, कूर्ग, बिलगिरीस, बाबुदान गिरीस एवं शेवरोय्स के क्षेत्रों में उपजे साफ़ किए गए अरेबिका से ये अनोखे व स्वादिष्ट कॉफियाँ तैयार की गई हैं। इसके दाने अधिक बड़े एवं साफ चमकदार रूप के साथ समरूपी नीले-हरे रंग के हैं। इस कॉफ़ी कप में संपूर्ण महक, स्वास्थ्य वर्धक, उत्तम अम्लता, थोडे मसाले के साथ उत्कृष्ट स्वाद संयोजित हैं। यह दुर्लभ, प्रीमियम विशिष्ट कॉफ़ी है तथा भारत की सर्वोत्तम कॉफ़ी का प्रतिनिधित्व करती है।


रोबस्टा कापी रॉयाल

Robusta Kaapi Royale

 

अंबारी के साथ राज्य स्तरीय गज तथा मस्तक पर छत्र, फूलों तथा आभूषणों से सजे त्योहारीय जुलूस, भारतीय राष्ट्र-गौरव का प्रतीक है। गज के समरूपी यह विशिष्ट भारतीय ‘कापीस’ उत्तम गुणता के बोल्ड अरेबिका से तैयार की जाती है।

कूर्ग, वयनाड, चिक्कमगलूरु ट्रावनकोर क्षेत्र के रोबस्टा पार्चमेंट एबी से यह कॉफ़ी बनाई जाती है। इसके दाने बडे, नुकीले सिरे के साथ गोल एवं भूरे से नीले-भूरे रंग के हैं। इसका कप संपूर्ण, मृदु, कोमल व रसीले स्वाद सुनिश्चित करता है।